Vinod raja meghwani (sampadak)
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दुर्ग संस्करण | विशेष रिपोर्ट | 21 अगस्त 2026
PDS के चावल की आपूर्ति पर उठे सवाल
पीसेगांव क्षेत्र की दो राइस मिलों में पिछले लॉट के CMR जमा होने की स्थिति जांच का विषय
सरकारी धान की मिलिंग और चावल जमा करने के नियमों के पालन पर निगाह; विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक सत्यापन से स्थिति होगी स्पष्ट
पीसेगांव/दुर्ग।
दुर्ग-बालोद मार्ग स्थित पीसेगांव क्षेत्र में संचालित दो राइस मिलों से संबंधित कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की शासकीय जमा स्थिति को लेकर सवाल सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह विषय खाद्य विभाग एवं संबंधित शासकीय एजेंसियों के रिकॉर्ड से सत्यापन का है।
सरकारी धान मिलिंग व्यवस्था में मिलर्स को आवंटित धान की मिलिंग के बाद निर्धारित नियमों और समय-सीमा के अनुसार तैयार चावल संबंधित शासकीय व्यवस्था में जमा करना होता है। ऐसे में यदि किसी मिल के पिछले लॉट का CMR निर्धारित मात्रा में जमा नहीं हुआ है, तो संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण है।
🔎 जांच में किन बिंदुओं पर हो सकता है फोकस?
01 | धान का आवंटन
संबंधित मिल को कितनी मात्रा में सरकारी धान आवंटित और उठाव किया गया?
02 | मिलिंग का रिकॉर्ड
उठाए गए धान के मुकाबले कितनी मात्रा में मिलिंग दर्ज की गई?
03 | CMR जमा
कितनी मात्रा में चावल शासकीय गोदाम/निर्धारित एजेंसी को जमा किया गया और कितनी मात्रा शेष है?
04 | समय-सीमा
क्या CMR जमा करने की निर्धारित समय-सीमा का पालन हुआ?
05 | भौतिक सत्यापन
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और मिल परिसर में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक में कोई अंतर है या नहीं?
⚠️ सबसे महत्वपूर्ण सवाल
रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में कितना अंतर है?
यदि किसी मिल पर CMR जमा करने में देरी है, तो इसका वास्तविक कारण संबंधित मिल संचालक के दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
सिर्फ चावल जमा होने में देरी को कालाबाजारी, गबन या स्टॉक में हेराफेरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
इनमें से कोई भी गंभीर आरोप तभी प्रकाशित किया जाना चाहिए जब उसके समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज, जांच रिपोर्ट या सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि उपलब्ध हो।
🏛️ प्रशासन से अपेक्षित जानकारी
एक खबर इंडिया निम्न बिंदुओं पर संबंधित विभाग से आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेगा—
दोनों मिलों को कितना सरकारी धान आवंटित किया गया?
कितना धान उठाया गया?
कितनी मात्रा में CMR जमा किया गया?
वर्तमान में कितनी मात्रा शेष है?
CMR जमा करने की निर्धारित अंतिम तिथि क्या थी?
क्या किसी मिल को नोटिस जारी किया गया है?
क्या भौतिक स्टॉक सत्यापन किया गया है?
सत्यापन में कोई कमी पाई गई तो विभाग ने क्या कार्रवाई की?
🗣️ मिल संचालकों का पक्ष भी जरूरी
किसी भी राइस मिल पर अनियमितता का आरोप प्रकाशित करने से पहले संबंधित मिल संचालक/प्रबंधन का पक्ष लेना आवश्यक है।
यदि संबंधित मिलों की ओर से CMR जमा करने में देरी का कोई वैध कारण, विभागीय अनुमति, समय-विस्तार अथवा अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उन्हें भी समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।
एक खबर इंडिया संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देता है।
📰 एक खबर इंडिया की टिप्पणी
सरकारी धान और PDS व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी
सरकारी धान की मिलिंग और CMR जमा करने की व्यवस्था सीधे सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी है। इसलिए इसमें रिकॉर्ड की पारदर्शिता, स्टॉक का सही हिसाब और समय पर चावल जमा होना महत्वपूर्ण है।
मामले में वास्तविक स्थिति आरोपों से नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड, भौतिक सत्यापन और संबंधित पक्षों के जवाब से स्पष्ट होगी।
सवाल उठाना हमारा अधिकार है, लेकिन निष्कर्ष दस्तावेज और जांच के आधार पर ही होना चाहिए।
⚖️ कानूनी सावधानी
यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी के आधार पर उठाए गए प्रश्नों और सत्यापन योग्य तथ्यों पर केंद्रित है। किसी व्यक्ति, संस्था या राइस मिल पर गबन, कालाबाजारी, हेराफेरी अथवा अन्य आपराधिक कृत्य का आरोप सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं लगाया जा रहा है।
यदि भविष्य में सक्षम सरकारी प्राधिकारी की जांच में कोई अनियमितता प्रमाणित होती है, तो उसके आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर आगे की रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी।
संबंधित मिलों/व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
एक खबर इंडिया न्यूज पोर्टल
संपादक: Vinod Raja Meghwani
संपादक | पत्रकार | RTI कार्यकर्ता | सोशल एक्टिविस्ट | पर्यावरण संरक्षक
मो.: 8962120882
सूचना
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