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जनसंख्या के मुद्दे परओवैसी आपतकाल में हुई नस बन्दी पर भी तो कुछ कहे


[ ] *" ओवैसी जी भड़काऊ बयान बाजी क्यो करते है "*

*" भड़काऊ भाईजान  हैदराबादी जी कभी आपातकाल में हुई नसबन्दी पर कोई भाषण क्यो नही देते  "*

 जनसंख्या पर नियंत्रण 

जरूरी है,,,अगर एक रोटी 

हो खाने वाले ,,,,, *" दस तो 
किसका भी पेट नही भरेगा 
बरसो पहले कांग्रेस पार्टी ने 
एक  नारा दिया था,,,,,हम 

दो हमारे दो ,,,,,,पर इस नारे 
का प्रचार प्रसार  सिर्फ एक 
ही समुदाय में किया 

था।हैदराबाद के एक 

भड़काऊ ,,,भाई जान,,,है  

कल इंडिया टीवी पे 

भड़काऊ भाई जान का 

भाषण चल राहा था  

भड़काऊ भाई जान बड़े 

शायरना अंदाज में भाषण 

दे रहे थे भाषण जनसंख्या 

पर ही था भड़काऊ भाई 

जान शायरी कह रहे थे हम 

दो ,,,,,पर हमारे दस क्यो 


नही ,,,,हम भड़काऊ भाई 

जान को अतीत में ले के 

चलते है जब आपातकाल 

लगा था तो संजय गांधी जी 
ने नसबन्दी कानून लाया था 
। "*Vinod Meghwani: सूचना: एक खबर ने ये लेख ओर फोटो गूगल से डाउनलोड किया है,,विनोद मेघवानी

इमरजेंसी के दौरान इंदिरा 

गांधी के बेटे संजय गांधी के 
नाम का लोगों में डर बैठ 

गया था. क्यों? वो इसलिए 

कि जबरन नसबंदी करवाने 
के उनके आदेश की वजह 

से गांव के गांव घेरे जा रहे 

थे. लाखों पुरुष मजबूर कर 
दिए गए नसबंदी के लिए. 

इमरजेंसी के दौरान इंदिरा 

के जिन कदमों की 

आलोचना हुई, उनमें ये 

कदम भी शामिल था. 

लेकिन इसका असर काफी 
लम्बे समय तक रहने वाला 

था. ये माना जाता है कि 

कांग्रेस पार्टी के उस समय 

अधोपतन में इस कदम ने 

महती भूमिका निभाई थी.

मास स्टरलाइजेशन यानी 

बड़ी संख्या में नसबंदी 

कराने की खबरें भले ही 

इमरजेंसी के दौरान आई 

हों. लेकिन जनसंख्या को 

काबू करने के लिए केरल में 

उससे काफी पहले से ही 

नसबंदी के कैम्प शुरू कर 

दिए गए थे. और वहां बेहद सफल भी हुए थे.

अगस्त 1970. कोचीन में 

डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट 

सेमिनार किया गया. इसमें 

एर्नाकुलम जिले को बेहतर 

बनाने, और उसके भविष्य 

के लिए तैयारियां करने को 

एजेंडा रखा गया. इसमें 

जनसंख्या

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